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Patna Zoo: पटना जू में आएंगे सिंगापुर के सफेद गैंडे, बढ़ेगी विदेशी वन्यजीवों की रौनक

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पटना जू में सिंगापुर से दो सिंग वाले सफेद गैंडे लाने की तैयारी चल रही है। एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एक सिंग वाले भारतीय गैंडों का जोड़ा सिंगापुर भेजा जाएगा।

पटना/आलम की खबर:राजधानी पटना का संजय गांधी जैविक उद्यान आने वाले समय में और भी आकर्षक बनने जा रहा है। बिहार के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल पटना जू में अब विदेशी वन्यजीवों की नई झलक देखने को मिल सकती है। जू प्रशासन ने सिंगापुर से दो सिंग वाले सफेद गैंडों का जोड़ा लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस योजना के तहत पटना जू से एक सिंग वाले भारतीय गैंडों का एक जोड़ा सिंगापुर भेजा जाएगा। वन एवं पर्यावरण विभाग और जू प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया को लेकर लगातार तैयारी में जुटे हुए हैं।

जानकारी के अनुसार यह पूरा कार्यक्रम एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के चिड़ियाघरों में वन्यजीवों की प्रजातीय विविधता बढ़ाना और दुर्लभ जानवरों के संरक्षण को मजबूत करना है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ पटना जू की पहचान और मजबूत होगी, बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को भी कुछ नया देखने का अवसर मिलेगा।

बताया जा रहा है कि सिंगापुर जू, पटना जू और बिहार सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के बीच इस आदान-प्रदान को लेकर बातचीत चल रही है। योजना को अंतिम रूप देने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम यह सुनिश्चित करेगी कि गैंडों के परिवहन के दौरान उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य पर कोई असर न पड़े।

जू प्रशासन के अनुसार दो सिंग वाले सफेद गैंडों को सिंगापुर से समुद्री मार्ग के जरिए भारत लाया जाएगा। पहले इन्हें जहाज से कोलकाता बंदरगाह तक लाया जाएगा और उसके बाद विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ सड़क मार्ग से पटना पहुंचाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि हवाई मार्ग की तुलना में समुद्री मार्ग अधिक किफायती और सुविधाजनक माना गया है। इसके अलावा लंबे सफर के दौरान जानवरों की देखभाल के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे।

पटना जू पहले से ही गैंडों की बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है। वर्तमान में यहां कुल 10 गैंडे मौजूद हैं, जिनमें छह मादा और चार नर शामिल हैं। जू प्रशासन के अनुसार सभी गैंडे वयस्क हैं और सबसे छोटे गैंडे की उम्र करीब पांच साल है। गैंडों की संख्या के मामले में पटना जू एशिया में पहले स्थान पर और दुनिया में दूसरे स्थान पर माना जाता है। इस उपलब्धि ने पटना जू को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खास पहचान दिलाई है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि दो सिंग वाले सफेद गैंडे भारतीय एक सिंग वाले गैंडों से काफी अलग होते हैं। इनका आकार बड़ा होता है और इनके शरीर की बनावट भी अलग दिखाई देती है। सफेद गैंडे मुख्य रूप से अफ्रीकी प्रजाति के माने जाते हैं और दुनिया में इनकी संख्या सीमित है। ऐसे में पटना जू में इनका आना पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम का सबसे बड़ा फायदा जैव विविधता को बढ़ावा देना होता है। इससे अलग-अलग देशों के चिड़ियाघरों में जानवरों की नई प्रजातियां पहुंचती हैं और उनके संरक्षण में मदद मिलती है। साथ ही प्रजनन कार्यक्रमों को भी मजबूती मिलती है। पटना जू में पहले भी कई दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण को लेकर सफल प्रयास किए जा चुके हैं।

पर्यटन के लिहाज से भी इस योजना को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पटना जू हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। छुट्टियों और त्योहारों के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। अब यदि दो सिंग वाले विदेशी गैंडे यहां आते हैं तो पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है। जू प्रशासन को उम्मीद है कि इससे राज्य में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

पटना जू में पिछले कुछ वर्षों में लगातार नए बदलाव किए गए हैं। जानवरों के बाड़ों को आधुनिक बनाया गया है और पर्यटकों की सुविधाओं में भी सुधार किया गया है। वन विभाग की कोशिश है कि जू को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाई जाए। इसी दिशा में विदेशी जानवरों को लाने की योजना को एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

जानकारों का कहना है कि किसी भी वन्यजीव को एक देश से दूसरे देश तक लाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है। जानवरों की मेडिकल जांच, क्वारंटीन व्यवस्था और परिवहन की सुरक्षा जैसे कई पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वजह है कि इस पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है।

पटना जू के अधिकारियों का कहना है कि यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो आने वाले महीनों में यह योजना धरातल पर दिखाई दे सकती है। फिलहाल वन्यजीव प्रेमियों और पटना जू आने वाले पर्यटकों के बीच इस खबर को लेकर उत्साह बढ़ गया है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही उन्हें बिहार में ही विदेशी सफेद गैंडों को देखने का मौका मिलेगा।

गौरतलब है कि दुनिया भर में वन्यजीव संरक्षण को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है। कई दुर्लभ प्रजातियां विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। ऐसे में चिड़ियाघरों की भूमिका केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे संरक्षण और जागरूकता के बड़े केंद्र बन चुके हैं। पटना जू की यह पहल भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यदि यह योजना सफल होती है तो आने वाले समय में पटना जू देश के सबसे खास जैविक उद्यानों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है। इससे न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण को फायदा मिलेगा बल्कि बिहार की पर्यटन छवि को भी नया आयाम मिल सकता है।

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